वात्सल्य- हिंदी कविता – A2Z

माँ। जिस शब्द में पूरा ब्रह्माण्ड छिपा है
जिसका वात्सल्य किसी विशेषण का मोहताज नहीं
जिसकी उपमा के लिए, कोई भी अलंकार कम है
माँ तुम्हे शब्दों में बाँध पाना कठिन है

तुम्हारे बारे में क्या बोलूं माँ
जो पहले नहीं बोला गया
तुम एक व्यक्तित्व नहीं, एक एहसास हो
मेहफ़ूज़ हूँ मैँ, इस बात का विश्वास हो

तुम्हारी आवाज़ की गूँज, मेरे दिन की रौनक है
मेरी ज़िन्दगी, मेरी बंदगी तुम्हारी ही देन है
सर्दियों की धूप सी तुम्हारी मुस्कुराहट
तुम्हारा स्नेह जैसे मखमली लिहाफ है

माँ मैँ भाग्यशाली हूँ, जो तुमको पाया है
तुम्हारे आँचल में जीवन का सार है
तुम्हारे बारे में और क्या बोलूं माँ
तुम्हे शब्दों में बाँध पाना कठिन है।

This post is written for #blogchatterA2Z and this is powered by Blogchatter.

उठाते हैं सर जब पीले फूल- हिंदी कविता – A2Z

बसंत पंचमी की देहरी पर
जब सरसों के पीले फूल सर उठाते हैं
कुमुदिनी की बहार मीठी बयार छेड़ती है
दोपहरिया लम्बी होती जाती है
और शाम खुशगंवार
हरियाली का आँचल पेड़ों को सहलाता है
ताज़ा तरीन हलके हरे पत्ते
कोपलों से फुफुसाते हैं
धानी सी चुनर
अंगड़ाई भर के सज जाती है
बारिश की फुहारें चमकीले छीटें बरसाती है
अंतर्मन गीला कर जाती है
रोआं रोआं जो कलप गया था ठण्ड के अन्धकार में
चंचल चपल हो जाता है
इस मादक बसंत बहार में

सुनहरी सूरज की किरणें उत्तेजित होती जाती हैं

जैसे किशोरावस्था का रोमांच
और चढ़ती है सोपान धीरे धीरे
जब गर्मी की परिकाष्ठा हो जाती है
और वसुंधरा दोपहरी में पंचांगनी ताप्ती है
मानसून की बारिश भी दस्तक देती है
और तपिश पे अल्पविराम लगाती है
रस चूता है पत्तों की ओट से

हरियाली वातानुकूलित हो जाती है
एक ठंडी सांस भर्ती हैं चेतनाएं
मीठे अल्फोंसो की चुस्की के लिए
और लंगड़ा के एक रसभरे फांक के लिए

मीठे फालसे लद जाते हैं पेड़ों के झुरमुठ से
और चंचल चहल रौशनी, टूट के बिखरने को बेकरार
बुनती हैं एक धूप छाँव का तानाबाना

जैसे गरम लू के थपेड़े वैसी इत्र की हल्की चटक
खूब रौनक लगाती है
जबतक की गर्मी अपना साज़ोसामान समेट नहीं लेती
और पतझढ़ आगाज़ भरता है |

This post is written for #blogchatterA2Z and this is powered by Blogchatter.

तजुर्बा- हिंदी कविता – A2Z

तेरी दग़ाबाज़ी ने हमारा ये हाल किया
कुछ और नहीं तो तजुर्बा दे दिया
अब लोगों को नसीहतें देते फिरते हैं
प्यार, और उसके नुक्सान के।

मुक़म्मल इश्क़ ना सही
शक्सीयत तो मेरी ज़हीन थी
मेरे हालातों ने मुझे तजुर्बा दिया
उम्र की औपचारिकता की जरुरत नहीं पडी।

अब किसी के साथ की तलब नहीं रही
तजुर्बे ने गलतियों से बचा के रखा है
ये अलग बात है, की गलतियां करके ही
ये तजुर्बा कमाया है।

अब तो बस यही दुःख है
की पहचान तो खूब हो गयी सही गलत की
पर इस तजुर्बे के पुलंदे के नीचे
ज़िन्दगी की मासूमियत कहीं दब गयी।

This post is written for #blogchatterA2Z and this is powered by Blogchatter.

शाम का मंज़र- हिंदी कविता – A2Z

गर्मी के दिन थे, शाम का समय था,
मैं आँगन में बैठी थी, पर मैं तो कवियित्री हूँ,
तो मैं ऐसा क्यों कहूं? मैं तो कुछ ऎसा कहूँगी
सुरमई सी शाम थी, लू के थपेड़े अब ख़स की ठंडक
में दब रहे थे, बागीचे से गुलाबों की ताज़ी हवा
एक मजमा जमा रही थी, और हवा भी कैसी
जैसे हज़ार घुंघरुओं की पाजेब पहने
थिरक रही हो, मेरे बांकपन को ठिकाना देते हुए
इस अंजुमन में खूबसूरती की बदपरहेज़ी मत पूछो
शाम ए उल्फत में मेरी तिश्नगी मत पूछो
मुसल्लम सी शाम और मुसलसल सी मैं
बेतरतीब ख्यालों से मशक्कत मत पूछो
ज़हनसीब इस रौनक की फ़िज़ा मत पूछो
मैं बेनज़ीर से,गलीचे मेँ खूशबूएं,खयालात छाँटती हूँ
रात का इस्तक़बाल करते महताब की पेशानी पे
अपनी रूह तलाशती हूँ |

This post is written for #blogchatterA2Z and this is powered by Blogchatter.

रात की चादर-हिंदी कविता – A2Z


सितारों की ओढ़नी से ये रात सुसज्जित है

चंदा की बिंदिया माथे पर दमकती है

रात की रानी मदहोशी सेचांदनी मे निखरती हैं

फिर वही रात हैं खाविषों से धूलि हुई

मैंने हाथ बढ़ा करकुछ सितारे समेटे हैं

सपनो के बोयाम में रखकरछोड़ दिया है

टिमटिमाहट तब परोसूँगी जब हसरतें उड़ान भरेंगी

चंपा के गजरे सी महक इस चांदनी के उजाले में है

जो आँगन में उतर आई है |

मेरे सपनों की बारीकी तो देखो

एक एक सितारा मैं चुनती हूँ

फिर चांदनी से धोकर उसको बोयाम में भरती हूँ

जैसे जुगनुओं का झुरमुठ वैसे सितारे दहकते हैं

मैँ ज़रदोज़ी के टाकों में सितारों को मढ़ती हूँ

लहराता आँचल मनचला हैं

अपनी खूबसूरती पर इठलाता है

रात के पटल पर ये कश्मकश चलती है

खाइशें और चटखारे लेती है

अब मैं चाँद चुराने आई हूँ

माथे पर सजाने आई हूँ |

This post is written for #blogchatterA2Z and this is powered by Blogchatter.

Point of view

Chinmayee's Creations

PC- Unsplash

“Goa….. “,screamed Pihu as she dropped her phone with excitement when their instant trip to goa got finalized. She had finally managed to convince her friends to have a quick trip to Goa after a lot of persuasion.

The moment, the plane landed at the Dabolim Airport, all of them screamed with joy anticipating the wonderful time that they were going to spend in the next two days. Goa redefines holidays with its exquisite mix of Sun, sand, and surf! The long stretches of white sand beaches, the sight of the sublime sunsets on the horizons, the coconut trees that adorn the roadsides, the carefree lifestyle, the availability of a variety of seafood cuisine, the mix of modernity with the rich and vibrant heritage oriented lifestyle, the amusing nightlife can always mesmerize the travelers and allures them to travel again and again.

“Pihu, I had told you, we…

View original post 1,418 more words

किनारा- हिंदी कविता – A2Z

मँझधार में क्या मज़ा है, किनारा नहीं जानता
किनारे में क्या ठहराव है, लहरों को इल्म नहीं
दोनों मलंग हैं अपनी ही रूहानियत में
अपनी ही नियति में, अपने ही सूरज में।

नमकीन मँझधार को पाने की चाहत में
लहरें किनारे से किनारा करती हैं
उठती हैं, बढ़ने की चाहत में, बीच भंवर
पर भींग कर, लौटती हैं, बेसब्र और झुँझलाई सी।

लहरों की आंखमिचोली किनारे और गहराई से
जैसे हंसी ठिठोली, वास्तविकता और परछाई से
मँझधार खींचता है अपनी ओर, लहरों की डोर
पर बंधी रहती हैं वो, एकाग्र एक छोर,

किनारे की गहराई से, नहीं होना उन्मुक्त उनको
मँझधार में किनारा है और किनारे में मँझधार
ये लहरों का समावेश है,ये एक पल मचलती हैं
एक पल ठहरती हैं , किनारे पे।

This post is written for #blogchatterA2Z and this is powered by Blogchatter.

प्रबोधन – हिंदी कविता – A2Z

कौतुहल से दूर, स्वयं के पास
प्रकृति में विचरते हुए
पेड़ फूल आसमान को फलते हुए
मैंने देखा है, महसूस किया है

सृजन की शक्ति को
पेड़ों की ओट में, चमकते सूरज को
पत्तों की गोद में, दुलारे फूलों को
हरियाली की छाओं में,ठंडी बयार को

एक पोषण मिलता है
हमारी थकियारी चेतनाओं को
मन में शुद्धि , तन में स्फूर्ति
एक तरोताज़ा छलांग लेती हैं इन्द्रियाँ

आत्मज्ञान की ख्याति बहुत सुनी थी
कल प्रकृति में विचरते हुए
क्षणभर के लिए ही सही
मुझे एक प्रबोधन का एहसास हुआ |

प्रबोधन – meaning = नींद से उठना, जागना।

This post is written for #blogchatterA2Z and this is powered by Blogchatter.

औरत-दुर्गा भी, काली भी!- हिंदी कविता – A2Z

जब दुर्गा मिटटी की मूरत है,तो उसकी पूजा करते हैं
पर जब दुर्गा जीवंत है, तब उसकी अवहेलना करते हैं
ढोल,शंकनाद, आरती से प्रतिमा का स्वागत करते हैं
और जब लक्ष्मी ब्याह के लाते हैं, उसका निरादर करते हैं

बहुत हुआ ये दोगलापन, ये आडम्बर, ये दिखावा
नारी तू नारायणी ही नहीं, कालरात्रि और मृत्यु भी है
तू जननी और सौम्य ही नहीं, चंडी और विनाशकारी भी है
धारण कर ले अपना रौद्र रूप, इस पैतृक व्ययवस्था में

जहां समाज के ठेकेदार तुझे जीने नहीं देंगे
चढ़ा के बलि तेरी, तुझे ही अर्पित करेंगे
इंसान के रूप में ये राक्षस, भूत, पिसाच हैं
नाश कर इन नकारात्मकताओं का, बन के आज तू काली

तू स्वयं ही खड़ी हो जा, आज स्वरक्षा में
अम्बिका तू चंडिका बनके, काल का तांडव रचा
ये पापी तब तेरे आगमन से पलायन करेंगे
तेरे अस्तित्व से आतंकित होकर, तुझे नमन करेंगे।

This post is written for #blogchatterA2Z and this is powered by Blogchatter.

नारी- हिंदी कविता – A2Z

PC – unsplash

मैं ख्वाबों को साड़ी की छोर से बांधती हूँ
मैं रिश्तों को गुल्लक में सहेजती हूँ
मैं अपना परिचय अपने परिजनों में पाती हूँ
मैं पल छीन लम्हों से ज़िन्दगी सजाती हूँ
मैं ख़ुशी में रोती हूँ, गम में मुस्कुराती हूँ
हरा नीला दर्द, दिल की कैफियत छुपाती हूँ
मैं विश्वास के आईने में, आशा की बिंदी लगाती हूँ
मैं मुख़्तसर से दिन में, पूरी ज़िन्दगी जी जाती हूँ
अपने नाम पर पिता और पति के उपनाम की ज़िल्द चढ़ाती हूँ
परतों और दायरों के बीच स्वछंद लहराती हूँ
मैं एक दुआ,एक जज़्बा, एक चिंगारी हूँ
मेरी यही पहचान है, मैं एक नारी हूँ ।

This post is written for #blogchatterA2Z and this is powered by Blogchatter.