पलाश के फूल !

एक पेड़ लदा है पलाश के फूलों सेसुर्ख लाल गुच्छा, एक हरा पत्ता भी नहींगहरी होती रात में, जहां खुशबुएं बेपर्दा हैंतुम मिले हो मुझे वहां परसमय से परे, ज़माने से बेपरवाहमैंने एक लम्हा चुरा लिया है,ख्वाइशों का वास्ता दे करबाद में वहाँ दास्ताँ मिलेगी, लम्हा घुल जायेगा कहीं परलाल स्याही से रंगे बेलॉस पलाशContinue reading “पलाश के फूल !”

Haibun!!

This green balm is serenading, spreading on my forehead beneath the yon sanguine sky. It’s becoming my top of the mind recall…diluting my berserk mind. They say nature stirs a clarity inside you….I say at least it’s engrossing. Each breath has become observant, reminiscent of the vista… thawing the emotions…outlining the blur. I breath aContinue reading “Haibun!!”