सुबह होने को है – हिंदी कविता

सुबह होने को है ऊंघते अनमनाते पेड़ों की ओट सेरात का कोहरा झांकता हैकोहरा जो हांफता हैअँधेरे को टटोलता है सब दिशाएं सुन्न हैंझींगुर लोरी मैं मगन हैचांदनी रात की अकेली परछाई मेंदूर कोई पंछी फड़फड़ाता हैं एक चिल्लाहट भर केफिर शांत हो जाता हैरात की फुसफुसाहटफिर दबे पैर चलती है फूलों की ठंडी ओसक्यारियोंContinue reading “सुबह होने को है – हिंदी कविता”

Dracula’s love letter- Winning poetry

Here’s the winning poetry:- Turn my blue heart red Who are you? My preying eyes have known this beguiling face since eternity But you’re not my charming wife, for she died in fire, by a bloody mob You’re someone else, born with the same scent at the nape of your neck The same serenading demeanor,Continue reading “Dracula’s love letter- Winning poetry”