नारी- हिंदी कविता – A2Z

PC – unsplash

मैं ख्वाबों को साड़ी की छोर से बांधती हूँ
मैं रिश्तों को गुल्लक में सहेजती हूँ
मैं अपना परिचय अपने परिजनों में पाती हूँ
मैं पल छीन लम्हों से ज़िन्दगी सजाती हूँ
मैं ख़ुशी में रोती हूँ, गम में मुस्कुराती हूँ
हरा नीला दर्द, दिल की कैफियत छुपाती हूँ
मैं विश्वास के आईने में, आशा की बिंदी लगाती हूँ
मैं मुख़्तसर से दिन में, पूरी ज़िन्दगी जी जाती हूँ
अपने नाम पर पिता और पति के उपनाम की ज़िल्द चढ़ाती हूँ
परतों और दायरों के बीच स्वछंद लहराती हूँ
मैं एक दुआ,एक जज़्बा, एक चिंगारी हूँ
मेरी यही पहचान है, मैं एक नारी हूँ ।

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Published by Daisy

I write whenever ideas crunch and overwhelme me! It's my reaction outpour.

8 thoughts on “नारी- हिंदी कविता – A2Z

  1. नारी की इतनी सुंदर व्याख्या- विश्वास के आईने में आशा की बिंदी लगाती हूँ। परतों और दाएँ के बीच स्वच्छंद लहराती हूँ। वाह!! क्या बात है !!

    Liked by 1 person

  2. मैं एक दुआ,एक जज़्बा, एक चिंगारी हूँ
    मेरी यही पहचान है, मैं एक नारी हूँ ।

    You summed up everything so beautifully. Do visit my blog for some unique facts on fairy tales
    Deepika Sharma

    Liked by 1 person

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