किनारा- हिंदी कविता – A2Z

मँझधार में क्या मज़ा है, किनारा नहीं जानताकिनारे में क्या ठहराव है, लहरों को इल्म नहींदोनों मलंग हैं अपनी ही रूहानियत मेंअपनी ही नियति में, अपने ही सूरज में। नमकीन मँझधार को पाने की चाहत मेंलहरें किनारे से किनारा करती हैंउठती हैं, बढ़ने की चाहत में, बीच भंवरपर भींग कर, लौटती हैं, बेसब्र और झुँझलाईContinue reading “किनारा- हिंदी कविता – A2Z”

Bon Voyage- Eugi’s weekly prompt

The prompt word is Summer. Here’s my entry:- Vintage Volkswagen camper van In Sea foam green and varying teal, Glides past leaving diesel after breath In the puffing holiday zeal. Triumphant for its maiden To the rip currents of Santa Monica, The Maui whooshes past the blushing spume like the freed wind harmonica. To theContinue reading “Bon Voyage- Eugi’s weekly prompt”