रात की चादर-हिंदी कविता – A2Z

सितारों की ओढ़नी से ये रात सुसज्जित है चंदा की बिंदिया माथे पर दमकती है रात की रानी मदहोशी सेचांदनी मे निखरती हैं फिर वही रात हैं खाविषों से धूलि हुई मैंने हाथ बढ़ा करकुछ सितारे समेटे हैं सपनो के बोयाम में रखकरछोड़ दिया है टिमटिमाहट तब परोसूँगी जब हसरतें उड़ान भरेंगी चंपा के गजरेContinue reading “रात की चादर-हिंदी कविता – A2Z”

प्रबोधन – हिंदी कविता – A2Z

कौतुहल से दूर, स्वयं के पासप्रकृति में विचरते हुएपेड़ फूल आसमान को फलते हुएमैंने देखा है, महसूस किया है सृजन की शक्ति कोपेड़ों की ओट में, चमकते सूरज कोपत्तों की गोद में, दुलारे फूलों कोहरियाली की छाओं में,ठंडी बयार को एक पोषण मिलता हैहमारी थकियारी चेतनाओं कोमन में शुद्धि , तन में स्फूर्तिएक तरोताज़ा छलांगContinue reading “प्रबोधन – हिंदी कविता – A2Z”

इ- इत्र सी मनभावन– हिंदी कविता – #A2Z

चैत और बैसाख की पुरवईयाजैसे कोई मीठी मादक बात,बसंत बहार का अल्हड रागजैसे बला सी खूबसूरत लाल गुलहड़ और गुलाबझींगुर की लोरी संगीतबद्ध, हरी लम्बी भीगी घासजैसे एक टुकड़ा जंगली खुशबू, एक मखमली टाटगाढ़ी नरगिसी डहेलिया की झुरमुटेंजैसे पीली फुवार में फब्ती चमकीली धूपफगुआ गाने को बेचैन गुलदाउदीजैसे सुनेहरे खुशखबरियों का गुच्छाइत्र सी मनभावन सफ़ेदContinue reading “इ- इत्र सी मनभावन– हिंदी कविता – #A2Z”

क – कतरा कतरा पिघलती शाम– हिंदी कविता – #A2Z

कतरा कतरा पिघलती शाममुझमें हर्फ़ – दर – हर्फ़ कुछ उकेरती हैरूहानी रोमानी गुलाबी छटाकशिश के रंग बिखेरती है ।ढलता सूरज ढलते आँचल सा मनचला हैमैं हरसिंगार इत्र सी पसरती हूँतुम्हारा प्यार रात की तरह भीतरघुन्ना हैमैं दिल के राज़ टटोलती हूँ ।मेरी तिश्नगी अँधेरे में डूब जाती हैपरछाइयों का मेला लग जाता हैमैं रातContinue reading “क – कतरा कतरा पिघलती शाम– हिंदी कविता – #A2Z”

Blog Tour – Daisy Bala’s Blossoms and Foliages

I’m happy to be taking part in the Blog Tour for Daisy Bala in promoting her bouquet of poetry. “If you truly love Nature, you will find Beauty … Blog Tour – Daisy Bala’s Blossoms and Foliages

सुबह होने को है – हिंदी कविता

सुबह होने को है ऊंघते अनमनाते पेड़ों की ओट सेरात का कोहरा झांकता हैकोहरा जो हांफता हैअँधेरे को टटोलता है सब दिशाएं सुन्न हैंझींगुर लोरी मैं मगन हैचांदनी रात की अकेली परछाई मेंदूर कोई पंछी फड़फड़ाता हैं एक चिल्लाहट भर केफिर शांत हो जाता हैरात की फुसफुसाहटफिर दबे पैर चलती है फूलों की ठंडी ओसक्यारियोंContinue reading “सुबह होने को है – हिंदी कविता”

Book Review – ‘Blossom and Foliages’ by Daisy Bala

One rainy morning, I wished to have a poetic treat to quench my thirst of roaming into the woods, sitting in silence beside the river and letting … Book Review – ‘Blossom and Foliages’ by Daisy Bala See, what my amazing thoughtful blogger friend Swarnali, has to say about my ebook “ Blossoms and foliages”!!Continue reading “Book Review – ‘Blossom and Foliages’ by Daisy Bala”

Wildflower🌸

Wildflower!! You’re born to be a wildflower Wilted but never shattered  Blooming in crevices of anonymity  Destined to rise above the withering  In the rebound of hope and aspirations.  A wild flower, in swathes of sunshine  Ripening from weed to flower head  With gorgeous smells embedded  You infatuate me with your austerity  I’m jealous ofContinue reading “Wildflower🌸”

Runner up in poetry competition@Kalamanthan

So glad to be a runner up in KalaManthan’s Second Poetry Prompt for English Poetry Writing. The prompt was “Falling leaves and Bare branches” And here’s the winning poem:- Title- Let’s rise this fall When the charms of summer sunshine and golden pleasantries begin to retreat And evocative winds pick pace, breaking a silence discreetContinue reading “Runner up in poetry competition@Kalamanthan”