वात्सल्य- हिंदी कविता – A2Z

माँ। जिस शब्द में पूरा ब्रह्माण्ड छिपा हैजिसका वात्सल्य किसी विशेषण का मोहताज नहींजिसकी उपमा के लिए, कोई भी अलंकार कम हैमाँ तुम्हे शब्दों में बाँध पाना कठिन है तुम्हारे बारे में क्या बोलूं माँजो पहले नहीं बोला गयातुम एक व्यक्तित्व नहीं, एक एहसास होमेहफ़ूज़ हूँ मैँ, इस बात का विश्वास हो तुम्हारी आवाज़ कीContinue reading “वात्सल्य- हिंदी कविता – A2Z”