मुसाफिर – हिंदी कविता – A2Z

चाँद रात का मुसाफिरभीनी गलियों में निकल पड़ता हैसितारों की कॉलोनी से गुज़रते हुएचौराहे पे चल पड़ता है झोले में चांदनी की छीटेंऔर खूशबूएं हज़ार हैमतवाला मुसाफिर चाँद हैफुर्सत की रात में टहलता है रुकता है, सुस्ताता हैमुसाफिरखाने की भीड़ छटती हैफिर चांदनी का कश मारकेरात के सन्नाटे को निगलता है धीमी आंच में थकContinue reading “मुसाफिर – हिंदी कविता – A2Z”

कुछ अनकही कुछ अनसुनी – हिंदी कविता – A2Z

जैसे स्लेट पर कोई चॉक फैल जाती हैवैसी चाँद की धीमी आंच पररात का सन्नाटा उबल रहा थाउन रात के सुनसान पलों मेंफिर ख्वाइशों ने ज़िन्दगी के नुमाइंदेबनकर सतह पकड़ीतुम्हारी कुछ अनकही कुछ अनसुनी बातेंरात की तरह परवाज़ चढ़ने लगीतुम्हारा अक्स, मुलायम चेहराजैसे घुलता गया मेरी दिनचर्या में“काश” की सीढ़ी लगाकर, सपनों नेबेशरम होने मेंContinue reading “कुछ अनकही कुछ अनसुनी – हिंदी कविता – A2Z”