मुसाफिर – हिंदी कविता – A2Z

चाँद रात का मुसाफिरभीनी गलियों में निकल पड़ता हैसितारों की कॉलोनी से गुज़रते हुएचौराहे पे चल पड़ता है झोले में चांदनी की छीटेंऔर खूशबूएं हज़ार हैमतवाला मुसाफिर चाँद हैफुर्सत की रात में टहलता है रुकता है, सुस्ताता हैमुसाफिरखाने की भीड़ छटती हैफिर चांदनी का कश मारकेरात के सन्नाटे को निगलता है धीमी आंच में थकContinue reading “मुसाफिर – हिंदी कविता – A2Z”