फ़- फ़लक से उतरी – हिंदी कविता – #A2Z

हुस्न की डिबियाखूबसूरती के रहनुमातुम ज़मीनी नहींफ़लक से उतरी होश्रृंगार रस में डूबीलिखी है तुम्हे मैंनेजिगर की चिठिया मेरी भव्य भाव्या,  श्रृंगार की डिबिया, आज तुम्हे बरबस ही याद किया, बहुत खूबसूरत हो तुम तुम्हारा श्रृंगार मुझमें रस बनके घुल जाता है और मैं गुलाबी पंखुड़ियों सी भीनी और मधुरिमा बन जाती हूँ। तुमने मुझेContinue reading “फ़- फ़लक से उतरी – हिंदी कविता – #A2Z”