लहराता दुपट्टा – हिंदी कविता – A2Z

ख़ामोशी बातों में, समंदर आँखों मेंमुस्कान लबों पे, जवाकुसुम बालों मेंऔर मोगरे का इत्र लगाकर,जब तुम नज़दीक से गुज़रती हो, तो मानो रुक सा जाता हूँ मैं तुम्हारी चंचलता, तुम्हारी सहजतातुम्हारा प्रतिबिम्ब, अमिट छाप छोड़ता है मुझपेवो माथे की बिंदी, वो जुड़वां काले नयनावो लहराता दुपट्टा, सम्मोहित करता है मुझे उस दिन तुम्हे जाते हुए,Continue reading “लहराता दुपट्टा – हिंदी कविता – A2Z”

कुछ अनकही कुछ अनसुनी – हिंदी कविता – A2Z

जैसे स्लेट पर कोई चॉक फैल जाती हैवैसी चाँद की धीमी आंच पररात का सन्नाटा उबल रहा थाउन रात के सुनसान पलों मेंफिर ख्वाइशों ने ज़िन्दगी के नुमाइंदेबनकर सतह पकड़ीतुम्हारी कुछ अनकही कुछ अनसुनी बातेंरात की तरह परवाज़ चढ़ने लगीतुम्हारा अक्स, मुलायम चेहराजैसे घुलता गया मेरी दिनचर्या में“काश” की सीढ़ी लगाकर, सपनों नेबेशरम होने मेंContinue reading “कुछ अनकही कुछ अनसुनी – हिंदी कविता – A2Z”

जज़ीरा- हिंदी कविता – A2Z

एक आग का दरिया हैये मोहब्बत का आगाज़ हैउस जज़ीरे की आस हैजो मझदार में क़यादत करे मेरी आँखों में समंदर हैफिरभी मैं प्यासी हूँइच्छाओं की बदपरहेज़ी हैकोई डूब जाने वाला चाहिये तुम मिले थे कल मुझेमचलते ख्वाब में ही सहीएक हसीं लम्हा चुरा लिया था मैंनेआंखमिचोली कर नींद से नहीं सोचूं तुम्हारे बारे मेंतोContinue reading “जज़ीरा- हिंदी कविता – A2Z”

इंद्रधनुष सपनों का- हिंदी कविता – A2Z

सपनों का इंद्रधनुष देखा है कभी ?कितना सुरम्य, कितना सजीला होता हैचमकता सात रंगों में है, खुशियां सैकड़ों देता हैअचंभित करनेवाली रंगावली! एक रंग सपना, एक रंग आशाएक रंग उन्नति, एक उमंग की परिभाषाएक रंग मिठास , एक रंग हंसीएक रंग प्रेम , जैसे रंगों की दीपावली! दुर्लभ वो दिन होता है,भीना सा इंद्रधनुष उगताContinue reading “इंद्रधनुष सपनों का- हिंदी कविता – A2Z”

ह- हुस्न पहाड़ों का-हिंदी कविता – A2Z

हुस्न पहाड़ों काक्या कहनाकी बारहों महीनेयहाँ मौसम जाड़ों का भीनी सी सुबह मेंकुमाऊँ हिमालय के चट्टानों सेसूरज की लालिमा उभरती हैएक भोर की धूप उगती है तो मानो जमी हुयी चोटीकुछ कसमसा के पिघलती हैलजाती हुयी पानी पानी सीझरनों में फूटती है ठंडा कलरव करता जलसरजू में आकर समाता हैज्यों ज्यों दिन चढ़ता हैप्रवाह उत्तेजितContinue reading “ह- हुस्न पहाड़ों का-हिंदी कविता – A2Z”

घ- घर-हिंदी कविता – A2Z

हर घर की एक दास्ताँ होती है, एक व्यक्तित्व होता हैजो उसकी दीवारें बयान करती हैं, उसका छत बतलाता हैखिड़कियाँ झांकती हैं, खुशियों की आंखमिचोली मेंदरवाज़ें तोमर से स्वागत करते हैं। घर जो बच्चों की हंसी से निखरता है,परस्पर प्रेम से पनपता हैत्योंहारों में सजता है, छुट्टियों में ऊंघता हैअपनी आशाओं, अपने आसमान से गूंजताContinue reading “घ- घर-हिंदी कविता – A2Z”

इ- इत्र सी मनभावन– हिंदी कविता – #A2Z

चैत और बैसाख की पुरवईयाजैसे कोई मीठी मादक बात,बसंत बहार का अल्हड रागजैसे बला सी खूबसूरत लाल गुलहड़ और गुलाबझींगुर की लोरी संगीतबद्ध, हरी लम्बी भीगी घासजैसे एक टुकड़ा जंगली खुशबू, एक मखमली टाटगाढ़ी नरगिसी डहेलिया की झुरमुटेंजैसे पीली फुवार में फब्ती चमकीली धूपफगुआ गाने को बेचैन गुलदाउदीजैसे सुनेहरे खुशखबरियों का गुच्छाइत्र सी मनभावन सफ़ेदContinue reading “इ- इत्र सी मनभावन– हिंदी कविता – #A2Z”

ध- धूप – हिंदी कविता – #A2Z

आसमान में छेद करके बिखरती पीली किरणेंतीखी धार सी बारीक, पिघले सोने सी चमकदारभीनी खुश्बुओं के तरह फैलती निरंतर,चहुंओर लगातारखुशखबरी सी मीठी बेसब्रर और ताज़ा और गिरती हैं जब खनककर पेड़ों पर, पत्तों परतब छन कर आती है धूप बिम्ब प्रतिबिम्ब मेंचंचल चहल चपल रौशनी, टूट के बिखरने को बेकरारबुनती हैं एक धूप छाँव काContinue reading “ध- धूप – हिंदी कविता – #A2Z”

क – कतरा कतरा पिघलती शाम– हिंदी कविता – #A2Z

कतरा कतरा पिघलती शाममुझमें हर्फ़ – दर – हर्फ़ कुछ उकेरती हैरूहानी रोमानी गुलाबी छटाकशिश के रंग बिखेरती है ।ढलता सूरज ढलते आँचल सा मनचला हैमैं हरसिंगार इत्र सी पसरती हूँतुम्हारा प्यार रात की तरह भीतरघुन्ना हैमैं दिल के राज़ टटोलती हूँ ।मेरी तिश्नगी अँधेरे में डूब जाती हैपरछाइयों का मेला लग जाता हैमैं रातContinue reading “क – कतरा कतरा पिघलती शाम– हिंदी कविता – #A2Z”

ब – बारिश और मैं – हिंदी कविता – #A2Z

आसमान से बरसी खुदाई हैकिसी की दुआ तो कुबूल हुई हैगीला हो गया है अंतर्मन एक राहत महसूस होती है ये चमकीली सजावट हैजो टूट के बरसी हैआज खुशियों का जन्मदिन हैतुम भी शामिल हो जाओ ये पानी के झालर हैंखनक के लहराते हैंझंकार से बूंदे बजती हैंकुछ संगीत सुनायी देता है मेरा एकालाप एकाग्र हैप्रफुल्लित हो रहा हैएक मादक हंसी उभरती हैआँखों की चमक में एक कोना मन का सूखा था ठेठ हो रहा थाचिंताओं की परिकाष्ठा थीइच्छाएं धूमिल हो रही थी इस मनभावन इत्र में इस बरसात की रौनक मेंजड़ में चेतना आ गयी मन की मिठास वातानुकूलित हो गयी ठंडी हवाContinue reading “ब – बारिश और मैं – हिंदी कविता – #A2Z”