इ- इत्र सी मनभावन– हिंदी कविता – #A2Z

चैत और बैसाख की पुरवईयाजैसे कोई मीठी मादक बात,बसंत बहार का अल्हड रागजैसे बला सी खूबसूरत लाल गुलहड़ और गुलाबझींगुर की लोरी संगीतबद्ध, हरी लम्बी भीगी घासजैसे एक टुकड़ा जंगली खुशबू, एक मखमली टाटगाढ़ी नरगिसी डहेलिया की झुरमुटेंजैसे पीली फुवार में फब्ती चमकीली धूपफगुआ गाने को बेचैन गुलदाउदीजैसे सुनेहरे खुशखबरियों का गुच्छाइत्र सी मनभावन सफ़ेदContinue reading “इ- इत्र सी मनभावन– हिंदी कविता – #A2Z”

ध- धूप – हिंदी कविता – #A2Z

आसमान में छेद करके बिखरती पीली किरणेंतीखी धार सी बारीक, पिघले सोने सी चमकदारभीनी खुश्बुओं के तरह फैलती निरंतर,चहुंओर लगातारखुशखबरी सी मीठी बेसब्रर और ताज़ा और गिरती हैं जब खनककर पेड़ों पर, पत्तों परतब छन कर आती है धूप बिम्ब प्रतिबिम्ब मेंचंचल चहल चपल रौशनी, टूट के बिखरने को बेकरारबुनती हैं एक धूप छाँव काContinue reading “ध- धूप – हिंदी कविता – #A2Z”

क – कतरा कतरा पिघलती शाम– हिंदी कविता – #A2Z

कतरा कतरा पिघलती शाममुझमें हर्फ़ – दर – हर्फ़ कुछ उकेरती हैरूहानी रोमानी गुलाबी छटाकशिश के रंग बिखेरती है ।ढलता सूरज ढलते आँचल सा मनचला हैमैं हरसिंगार इत्र सी पसरती हूँतुम्हारा प्यार रात की तरह भीतरघुन्ना हैमैं दिल के राज़ टटोलती हूँ ।मेरी तिश्नगी अँधेरे में डूब जाती हैपरछाइयों का मेला लग जाता हैमैं रातContinue reading “क – कतरा कतरा पिघलती शाम– हिंदी कविता – #A2Z”

ब – बारिश और मैं – हिंदी कविता – #A2Z

आसमान से बरसी खुदाई हैकिसी की दुआ तो कुबूल हुई हैगीला हो गया है अंतर्मन एक राहत महसूस होती है ये चमकीली सजावट हैजो टूट के बरसी हैआज खुशियों का जन्मदिन हैतुम भी शामिल हो जाओ ये पानी के झालर हैंखनक के लहराते हैंझंकार से बूंदे बजती हैंकुछ संगीत सुनायी देता है मेरा एकालाप एकाग्र हैप्रफुल्लित हो रहा हैएक मादक हंसी उभरती हैआँखों की चमक में एक कोना मन का सूखा था ठेठ हो रहा थाचिंताओं की परिकाष्ठा थीइच्छाएं धूमिल हो रही थी इस मनभावन इत्र में इस बरसात की रौनक मेंजड़ में चेतना आ गयी मन की मिठास वातानुकूलित हो गयी ठंडी हवाContinue reading “ब – बारिश और मैं – हिंदी कविता – #A2Z”