रात की चादर-हिंदी कविता – A2Z


सितारों की ओढ़नी से ये रात सुसज्जित है

चंदा की बिंदिया माथे पर दमकती है

रात की रानी मदहोशी सेचांदनी मे निखरती हैं

फिर वही रात हैं खाविषों से धूलि हुई

मैंने हाथ बढ़ा करकुछ सितारे समेटे हैं

सपनो के बोयाम में रखकरछोड़ दिया है

टिमटिमाहट तब परोसूँगी जब हसरतें उड़ान भरेंगी

चंपा के गजरे सी महक इस चांदनी के उजाले में है

जो आँगन में उतर आई है |

मेरे सपनों की बारीकी तो देखो

एक एक सितारा मैं चुनती हूँ

फिर चांदनी से धोकर उसको बोयाम में भरती हूँ

जैसे जुगनुओं का झुरमुठ वैसे सितारे दहकते हैं

मैँ ज़रदोज़ी के टाकों में सितारों को मढ़ती हूँ

लहराता आँचल मनचला हैं

अपनी खूबसूरती पर इठलाता है

रात के पटल पर ये कश्मकश चलती है

खाइशें और चटखारे लेती है

अब मैं चाँद चुराने आई हूँ

माथे पर सजाने आई हूँ |

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Published by Daisy

I write whenever ideas crunch and overwhelme me! It's my reaction outpour.

6 thoughts on “रात की चादर-हिंदी कविता – A2Z

  1. एक एक सितारा मैं चुनती हूँ, फिर चांदनी से धोकर उसको बोयाम में भरती हूँ!!Look, how wonderfully you have carved your dreams around the beauty of night!!

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