फ़- फ़लक से उतरी – हिंदी कविता – #A2Z

PC – unsplash

हुस्न की डिबिया
खूबसूरती के रहनुमा
तुम ज़मीनी नहीं
फ़लक से उतरी हो
श्रृंगार रस में डूबी
लिखी है तुम्हे मैंने
जिगर की चिठिया

मेरी भव्य भाव्या, 

श्रृंगार की डिबिया,

आज तुम्हे बरबस ही याद किया,

बहुत खूबसूरत हो तुम

तुम्हारा श्रृंगार मुझमें रस बनके घुल जाता है

और मैं गुलाबी पंखुड़ियों सी भीनी और मधुरिमा बन जाती हूँ।

तुमने मुझे खूबसूरत बनाया, ये नहीं कहूंगी

पर मैं कितनी खूबसूरत हूँ, तुमने ही बताया है

तुम जो ये मखमली खूशबूएं, चाँद की चांदनी और सुर्ख लाल

अपने में संजोयी हो, मैं लगाकर नखरेवाली बन जाती हूँ,

कहाँ से लाती हो तुम इतनी रूहानियत, इतना आकर्षण

मैं परमानन्द का अनुभव करती हूँ। 

सचमे, श्रृंगार नहीं, सुखव्यपार, कायाकल्प हो तुम

सुन रही हो ना श्रृंगार सखी ?

तुम मुझमें फैल कर मुझे संदली सी मुलायम, 

आषनी सी उजली बनाती हो , 

मुझे भीतर से सशक्त करती जाती हो

तुम्हारी रंगों की छटा, मेरे मिज़ाज़ में मिल कर , 

शाम शरबती कर देते हैं

जानती हो , उस दिन वो गुलाबी लिपस्टिक लगाई थी, 

दिन कत्थई हो गया था

निशब्द हूँ तुम्हारी भाव भंगिमाओं में, क्या रौनक लगा देती हो

कच्ची गुलाब सी बहकती हूँ मैं !

तुम मेरी सहभागिनी हो, 

मेरी शख्सियत का अलंकरण….

हमेशा यूँही शानदार दिखती रहना,

कहती है…..तुम्हारी तन्मयता में डूबी,

तुम्हारी सबसे बड़ी प्रशंसक!

This post is written for #blogchatterA2Z and this is powered by Blogchatter

Published by Daisy

I write whenever ideas crunch and overwhelme me! It's my reaction outpour.

6 thoughts on “फ़- फ़लक से उतरी – हिंदी कविता – #A2Z

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: