इ- इत्र सी मनभावन– हिंदी कविता – #A2Z

PC – unsplash

चैत और बैसाख की पुरवईया
जैसे कोई मीठी मादक बात,
बसंत बहार का अल्हड राग
जैसे बला सी खूबसूरत लाल गुलहड़ और गुलाब
झींगुर की लोरी संगीतबद्ध, हरी लम्बी भीगी घास
जैसे एक टुकड़ा जंगली खुशबू, एक मखमली टाट
गाढ़ी नरगिसी डहेलिया की झुरमुटें
जैसे पीली फुवार में फब्ती चमकीली धूप
फगुआ गाने को बेचैन गुलदाउदी
जैसे सुनेहरे खुशखबरियों का गुच्छा
इत्र सी मनभावन सफ़ेद चंपा-चमेली
जैसे मुलायम कामातुर सुगंध में महकती रात
धुलक्कड आंधी को चित्त करती हल्की फुहार,
जैसे रसवंती झालर, एक वातानुकूलित झंकार
जैसे चटकीली तम्मना ,एक झुण्ड ज़िन्दगी, एक गुलदस्ता चाह
रंगीन खुशबुएं सर्वत्र, जैसे महक उठा गुलशन !

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Published by Daisy

I write whenever ideas crunch and overwhelme me! It's my reaction outpour.

6 thoughts on “इ- इत्र सी मनभावन– हिंदी कविता – #A2Z

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